Wednesday, May 13, 2020

वैश्विक महामारी ने देश को गहरे संकट में डाल दिया।

श्रमिकों का दर्द

 वैश्विक महामारी कोरोना ने देश को गहरे  संकट में डाल दिया है। देश की  अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई हैं ।सबसे ज्यादा उद्योग जगत प्रभावित हुआ है। देश की राजधानी दिल्ली ,माया नगरी ,मुंबई और गुजरात में कोरोना संक्रमित  मरीजों की संख्या बहुतायत है ।इन जगहों में रहने वाले मजदूर अपने घरों की ओर जाने के लिए पलायन कर रहे हैं। यह मजदूर अधिक रुपए देकर गाड़ी बुक करके और कुछ अपने साधनों से जैसे ऑटो, ट्रक, लोडर, मोटरसाइकिल ,साइकिल के जरिए अपने गंतव्य स्थानों के लिए पलायन कर रहे हैं । मजदूरों के लिए  यह कोरोना संकट काल  बड़ी परेशानी का सबब बन गया  है। रोज के कमाने खाने वाले मजदूरों के सामने संकट की स्थिति हो गई है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20  लाख करोड़  रुपए केआर्थिक पैकेज का ऐलान किया है। लेकिन उन मजदूरों को क्या होगा जो पैदल ही अपने अपने घरों की ओर लौट रहे हैं इनमें से कुछ ऐसे हैं ।जो अन्य संसाधनों से घरों की ओर जा रहे हैं सबसे बड़ी समस्या यह है कि मजदूरों का पैदल चलना खत्म नहीं हुआ है इनके लिए कोई भी किसी भी प्रकार की कोई भी सहायता नहीं की जा रही है। सरकार ने जो ट्रेनें भी चलाई हैं वह भी सभी ऐसी हैं और उनमें बिना बुकिंग के कोई भी व्यक्ति अपने गंतव्य स्थान की ओर नहीं जा सकता है सरकार को सोचना चाहिए कि इनमें से कई मजदूर ऐसे हैं जिनके पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है या जिनको आईआरटीसी की जानकारी नहीं है तो फिर यह लोग कैसे अपने अपने घरों  में  जाएंगे।   यह मजदूर ट्रकों में जिस तरीके से अपने गंतव्य स्थान की ओर जा रहे हैं वहां बहुत ही दयनीय है।
 तपती धूप और पुलिस के डंडे इन मजदूरों के हौसलों को कम ना कर सकी है। कुछ मजदूरों ने पानी की बोतलों को पैरों में चप्पल की तरह बांध कर पैदल चलना शुरू कर दिया। चिलचिलाती धूप में पैरों में प्लास्टिक की बोतल बांधे सफर पर निकले मजदूरों की तस्वीर सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है। बड़ी संख्या में मजदूर घर जाने की आस में सड़कों पर जहां-तहां बैठे नजर आए। काफी इंतजार के बाद जब कोई बस नहीं मिली तो कड़ी धूप में पैदल ही घर की तरफ निकल पड़े। इन मजदूरों का कहना था कि घर में खाने के लिए कुछ नहीं है और फैक्ट्रियां खुल नहीं रही  है।घर जाने के लिए पैसा नहीं है। व्यवस्था नहीं है क्या करें समझ में नहीं आ रहा है, ऐसे तो भूखे मर जाएंगे।
उन्नाव संवाददाता
पंकज श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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