उ.प्र. सरकार ने गलत कार्य में नहीं दिया निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी का साथ
लखनऊ (मा.स.स.). पत्नी की हत्या के मामले में सीबीआई की जांच झेल रहे निर्दलीय विधायक अमनमणि का बड़ा फ्रॉड खुल गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के स्वर्गीय पिता आनंद सिंह बिष्ट के नाम पर कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन में भी केदारनाथ तथा ब्रद्रीनाथ तक का पास एलॉट कराने वाले अमनमणि त्रिपाठी ने अब उत्तर प्रदेश सरकार ने भी किनारा कर लिया है।
महराजगंज के नौतनवां से विधायक अमनमणि त्रिपाठी को दस अन्य लोगों के साथ लॉकडाउन का उल्लंघन करने के मामले में ऋषिकेश में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उनको जमानत कर रिहा किया गया है। यह जानकारी लखनऊ आने पर योगी आदित्यनाथ सरकार ने तत्काल ही एक पत्र जारी कर अमनमणि के मामले से पल्ला झाड़ लिया है। विवादों के कारण अक्सर ही चर्चा में रहने वाले विधायक अमनमणि त्रिपाठी के बड़े झूठ का पुलिंदा खुल गया है। विधायक ने लॉकडाउन में बंद केदारनाथ तथा बद्रीनाथ का दर्शन करने की खातिर सीएम योगी आदित्यनाथ के स्वर्गीय पिता के क्रिया कर्म के नाम पर एक पत्र उत्तराखंड के अपर मुख्य सचिव ने जारी करा लिया था। अब उसके सारे झूठ का पुलिंदा खुल गया है।
विधायक अमन मणि त्रिपाठी पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लेकर फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगा है। आरोप यह है कि विधायक ने सीएम योगी आदित्यनाथ के पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होना का हवाला देकर लॉकडाउन में निकलने का पास बनवाया और उसके बाद एक दर्जन लोगों के साथ तीन गाडिय़ों के काफिला के साथ बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्रा पर निकल गए। सीएम योगी आदित्यनाथ के भाई महेंद्र ने किसी भी पितृ कार्य से इंकार किया है। जिसके बाद विधायक व उनके 10 अन्य साथियों के खिलाफ उत्तराखंड के टिहरी जिले के मुनीकीरेती थाने में महामारी अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने बिताया कि मुनि की रेती पुलिस स्टेशन पर यूपी विधायक अमन मणि त्रिपाठी और 10 अन्य के खिलाफ लॉकडाउन के मानदंडों का उल्लंघन करने के आरोप में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।
इससे पहले विधायक अमनमणि त्रिपाठी और दस सहयोगियों को लॉकडाउन प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के कारण ऋषिकेश में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद सभी को जमानत पर छोड़ दिया गया।विधायक अपने सहयोगियों के साथ बद्रीनाथ की यात्रा पर जा कर रहे थे। उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग में पुलिस अधिकारियों ने रविवार शाम को उनका प्रवेश रोक दिया। विधायक त्रिपाठी और सहयोगियों पर भारतीय दंड संहिता, आपदा प्रबंधन अधिनियम और महामारी रोग अधिनियम की धारा 188, 269 और 270 के तहत मामला दर्ज किया गया था। उत्तराखंड के डीजी लॉ एंड ऑर्डर अशोक कुमार ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें नोटिस देने के बाद वापस उत्तर प्रदेश भेज दिया गया है। अमनमणि त्रिपाठी ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता की आत्मा की मुक्ति के लिए प्रार्थना करने के लिए पवित्र मंदिर की यात्रा करने की अनुमति मांगी थी। दिलचस्प बात यह कि अनुमति पत्र कथित तौर पर उत्तराखंड प्रशासन ने दिया है। लॉकडाउन में केदारनाथ में भक्तों का प्रवेश वॢजत है और बद्रीनाथ मंदिर 15 मई को खुलेगा। भाजपा के प्रदेश प्रवकता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि विधायक अमनमणि त्रिपाठी के मामले में दोनों राज्य सरकार अब जांच भी कराएंगी।
इस बीच आरटीआई एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने उत्तराखंड के अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश व देहरादून के अपर जिलाधिकारी पर कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है। उनको उत्तराखंड के अपर मुख्य सचिव के हस्ताक्षर से ही पास जारी किया गया था। यह पत्र उत्तराखंड के अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश व देहरादून के अपर जिलाधिकारी रामजी शरण के हस्ताक्षर से जारी हुए थे।
विधायक को जारी पत्र के अनुसार, उन्हें दो मई से सात मई तक यात्रा करने का पास दिया गया था। कार्यक्रम के अनुसार, दो मई को देहरादून से श्रीनगर पहुंचना था, लेकिन वे गौचर पहुंच गए। इसी तरह तीन मई को बद्रीनाथ, पांच को केदारनाथ व सात मई को वापस लौटना था। उत्तर प्रदेश के विवादित विधायक अमनमणि त्रिपाठी पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप है। इसके साथ ही अपहरण के भी मामले दर्ज हैं। उनके पिता पूर्व विधायक अमरमणि त्रिपाठी व मां मधुमणि 2003 में लखनऊ में कवियित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास में जेल में बंद हैं।
Labels: LUCKNOW

0 Comments:
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home