परेशानी का कोई माप दंड नहीं होता।
परेशानी का कोई मापदंड नहीं होता, कोई परेशानी किसी एक के लिए छोटी तो दूसरे के लिए काफी बड़ी होती है। फिर भी कई मर्तवा व्यक्ति किसी परेशानी के चलते इतना टूट जाता है कि वह परेशानी उसे जिंदगी से बड़ी नज़र आने लगती है। बातें करना आसान है। प्रतिक्रिया देना भी आसान है। लेकिन जिसे परेशानी है उसके मन की व्यथा कोई नही जानता। काविल ओर होनहार अभिनेता सुशांत सिंह महज 34 बर्ष की उम्र में खुद ही दुनिया छोड़ गए। मन को झंगझोर देने वाला यह समाचार काफी कष्टदायक है। बार बार मन में कई तरह के सवालात हिचकोले मार रहे हैं। जिस मुकाम पर सुशांत पहुंचे वहां पहुंचने का सपना लाखों नोजवानों का होता है लेकिन गिनेचुने लोग ही वहां पहुंच पाते हैं। लोगों का कहना है कि क्या कोई परेशानी जिंदगी से बढ़ी भी हो सकती है ?....लेकिन साहब परेशानी कहाँ आम और खास में फर्क करती है। सुशांत की सबसे वेहतरीन फ़िल्म महेन्द सिंह धोनी के जीवन पर बनी थी जिसे हम सभी कभी नही भूल सकते। छोटे पर्दे से सिनेमा तक का सफर तय करने वाले बॉलीवुड के माही को विनम्र श्रद्धांजली।
.................. *✍️आशीष मालवीय "जर्नालिस्ट"*

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