पनकी मंदिर में आया एक और नया विवाद ,जानिए क्या
उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित पनकी मंदिर के विवाद में बुधवार को नया मोड़ आ गया। हाल में बने ट्रस्ट श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर श्राइन बोर्ड का अभी तक विरोध करने वाले अयोध्या के मणिराम दास छावनी पीठाधीश्वर महंत नृत्य गोपाल दास अब उसके पक्ष में आ गए हैं।
इतना ही नहीं नए ट्रस्ट को खत्म करने की बात कहने वाले और जितेंद्र दास व कृष्ण दास को मंदिर की महंती की जिम्मेदारी देने वाले नृत्य गोपाल दास ने अब इन्हीं दोनों महंतों से नए ट्रस्ट के साथ मिलकर काम करने की बात कही है। कहा है कि पदाधिकारियों के साथ मिलकर मंदिर का विकास कराएं।
इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी को पत्र भी लिखा है। महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने इसकी पुष्टि भी की है। एक सप्ताह पहले अयोध्या पहुंचे जितेंद्र दास ने महंत नृत्य गोपाल दास को मंदिर की महंती और नए ट्रस्ट को लेकर चल रहे विवाद की जानकारी दी थी।
इसके बाद नए ट्रस्ट के पदाधिकारी भी वहां पहुंचे थे। बैठक में नृत्य गोपाल दास ने कहा था कि जब पहले से एक ट्रस्ट है तो नए की क्या आवश्यकता। साथ ही जितेंद्र दास और कृष्ण दास को मंदिर की महंती की जिम्मेदारी सौंपी थी। मंगलवार को भी जितेंद्र दास ने नए ट्रस्ट को चुनौती दी थी। इस संबंध में नृत्य गोपाल दास का लिखा पत्र जिलाधिकारी को उन्हें सौंपना था।
कानपुर आए लेकिन पत्र सौंपने से पहले बुधवार को नए ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी अमित नारायण त्रिवेदी, रामजी त्रिपाठी, ट्रस्टी दिनेश बाजपेई व ट्रस्ट के वरिष्ठ सलाहकार सत्यनारायण द्विवेदी अयोध्या पहुंच गए। बातचीत के बाद नृत्य गोपाल दास ने अपना यह नया फैसला सुना दिया।
कानपुर से संत समाज भी पहुंचा था अयोध्या
श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर पनकी का विवाद सुलझाने के लिए बुधवार को बड़ी संख्या में शहर का संत समाज भी अयोध्या पहुंचा था। इसमें सिद्धनाथ आश्रम के बालयोगी अरुण पुरी महाराज प्रकाशानंद जितेंद्रिय स्वामी समेत अन्य संत थे।
परमार्थ ट्रस्ट को बताया प्राइवेट
नए ट्रस्ट के वरिष्ठ सलाहकार सत्येंद्र कुमार द्विवेदी का दावा है कि परमार्थ ट्रस्ट प्राइवेट है। जिस ट्रस्ट में जितेंद्र दास ने अपने को संस्थापक कहा है, वह पनकी मंदिर 500 साल पुराना है। ऐसे में जितेंद्र दास कैसे मंदिर के संस्थापक हो सकते हैं। वहीं उनका दावा है कि जब ट्रस्ट 2010 में बना था, तब जितेंद्र दास पनकी मंदिर के महंत नहीं थे। तब बड़े महंत रमाकांत बाबा थे, जबकि छोटे महंत भुवनेश्वर दास बाबा थे। उसके अलावा इस ट्रस्ट के बैंक खाते से किसी महिला को चेक से कई बार भुगतान किया गया है।
महंत नृत्य गोपाल दास महाराज का मंतव्य यही है कि सभी लोग मिल-जुलकर नए ट्रस्ट श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर श्राइन बोर्ड में सहयोग करें। आपस में प्रेम करें। जब महंत जितेंद्र दास को आधे हिस्से का मालिक बना दिया गया है तो आप अपना आधा हिस्सा देखें। रही बात श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर परमार्थ ट्रस्ट की तो वह मैंने नहीं देखा है और न ही उसके बारे में कुछ जानता हूं।
महंत कमलनयन दास, उत्तराधिकारी, मणिराम दास छावनी पीठाधीश्वर महंत नृत्य गोपाल दास
हम लोगों ने महंत नृत्य गोपाल दास के समक्ष समाचार पत्रों की कटिंग रखी। उसको देखने के बाद उन्होंने निर्देश दिया कि आप लोग मिल-जुलकर मंदिर विकास के लिए काम करें। कृष्ण दास और जितेंद्र दास को भी निर्देश दिया है कि ट्रस्टियों का सहयोग करें। पुराने परमार्थ ट्रस्ट के बारे में बताया कि वह प्राइवेट ट्रस्ट था। इसमें चार लोग मथुरा के, अमित नारायण त्रिवेदी, रमाकांत बाबा व भुवनेश्वर दास बाबा हैं। अमित नारायण त्रिवेदी को एक बार भी बैठक में नहीं बुलाया गया। इससे पता चलता है कि ट्रस्ट कितना सही और गलत है।
स्वामी नाथ गिरी की रिपोर्ट
Labels: Kanpur

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