अब 11 साल पुराने अवमानना के मामले में प्रशांत भूषण के खिलाफ कल सुप्रीम कोर्ट में होगी
अब 11 साल पुराने अवमानना के मामले में प्रशांत भूषण के खिलाफ कल सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
एडवोकेट प्रशांत भूषण (Advocate Prashant Bhushan) के खिलाफ यह नया मामला 2009 में तहलका पत्रिका को दिए एक इंटरव्यू (interview) से संबंधित है, जिसमें प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने आरोप लगाया था कि भारत के 16 मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) में से कम से कम आधे भ्रष्ट थे.
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को एडवोकेट प्रशांत भूषण (Advocate Prashant Bhushan) के खिलाफ 11 साल पुराने (2009 के) अवमानना मामले (Contempt case) का स्वत: संज्ञान लेते हुए संवैधानिक सवालों को सामने रखा है. इस मामले में कल न्यायमूर्ति (Justice) एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ (bench) को सुनवाई करनी है. इससे पहले एक मामले में प्रशांत भूषण को एक अन्य न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) के मामले में एक रुपये का जुर्माना (fine) भरने की सजा हुई थी.
यह मामला 2009 में तहलका पत्रिका को दिए एक इंटरव्यू (interview) से संबंधित है, जिसमें प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने आरोप लगाया था कि भारत के 16 मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) में से कम से कम आधे भ्रष्ट थे. इस मामले को लेकर न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, बीआर गवई और कृष्ण मुरारी की पीठ (Bench) ने कहा था कि निम्नलिखित प्रश्न, बड़े असर वाले हैं-
(i) यदि किसी न्यायाधीश/ न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार के लिए एक सार्वजनिक बयान स्वीकार्य हो, तो किन परिस्थितियों और किस आधार पर, ऐसा किया जा सकता है, और इससे सुरक्षा के उपायों (यदि कोई हो तो) का अवलोकन किया जाना है.
(ii) यदि किसी पद पर आसीन न्यायाधीश पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया हो तो इसकी शिकायत के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए?
(iii) क्या सेवानिवृत्त न्यायाधीश/ न्यायाधीशों के खिलाफ, भ्रष्टाचार के लिए कोई भी आरोप सार्वजनिक रूप से लगाया जा सकता है, जिससे न्यायपालिका में आम जनता का विश्वास हिल जाता है. और क्या यह न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत दंडनीय होगा?
खबर सूत्रों के हवाले से

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