बरेलीः बरसों की कशमकश होगी खत्म.. बरसों बाद रबर फैक्ट्री एरिया में रौनक लौटेगी
बरेलीः बरसों की कशमकश होगी खत्म.. बरसों बाद रबर फैक्टरी एरिया में लौटेगी रौनक
अपने समय में यूपी के बड़े उद्योगों में शुमार होने वाली रबर फैक्टरी यूं तो 1999 में ही बंद हो गई थी लेकिन इसके बाद भी कई सालों तक उसके सैकड़ों कर्मचारियों में उसके ताले फिर खुलने की आस बनी रही. आखिर जब यह तय हो गया कि फैक्टरी की चिमनियां अब दोबारा धुआं नहीं उगलने वाली तो इसकी करीब 13 सौ एकड़ जमीन पर नए उद्योग स्थापित करने की बात शुरू हुई. पिछले कई सालों से इस मामले में सिर्फ कागजी खानापूरी हो रही थी लेकिन राज्य सरकार की ओर से इस जमीन पर अपना स्वामित्व स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करने से अब वाकई रबर फैक्टरी की रौनक लौटने के आसार बनने लगे हैं.
फतेहगंज पश्चिमी में रबर फैक्टरी स्थापित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 1950 के दशक में मुंबई के सेठ किलाचंद को 17 सौ एकड़ जमीन सशर्त लीज पर दी थी. इस जमीन पर रबर फैक्टरी सिंथेटिक्स एंड केमिकल्स के नाम से शुरू हुई जो करीब चार दशक तक पूरे यूपी का प्रमुख उद्योग बने रहने के बाद औद्योगिक विवादों और दूसरे कारणों से 15 जुलाई 1999 को बंद हो गई. इसके बाद कई सालों तक उसे फिर शुरू कराने की कोशिशें की गईं लेकिन राज्य से केंद्र सरकार तक पैरवी के बावजूद इसमें कामयाबी नहीं मिली.
फैक्टरी पर उसके कर्मचारियों और बैंक की देनदारियां 500 करोड़ रुपये तक पहुंच गईं जिसके बाद यह मामला और जटिल हो गया. पांच साल पहले बरेली में इको टेक्सटाइल पार्क बसाने की तैयारी हुई लेकिन यह प्रोजेक्ट तमाम अड़चनों से ही नहीं उबर पाया. दो साल पहले बरेली के दौरे पर आए हथकरघा विभाग के निदेशक रमारमण ने टेक्सटाइल पार्क और रबर फैक्टरी जमीन को मिलाकर इंडस्ट्रियल हब बनाने पर प्रस्ताव तैयार कराया. इसके दो साल बाद अब सरकार जागी है जिसके बाद रबर फैक्टरी की जमीन पर राज्य सरकार का स्वामित्व दर्ज कराने के साथ उस पर कब्जा लेने की भी प्रक्रिया शुरू कराई गई है.
संवाददाता
अंशुमाली सिन्हा की रिपोर्ट

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