Monday, May 11, 2020

मजदूरों के निशुल्क सफर के सरकारी दावे खोखले

मजदूरों के निशुल्क सफर के सरकारी दावे खोखले
"कहां तय था चरांगा पूरे शहर के लिए
कहां चिराग मयस्सर नहीं है घर के लिए"

 कोरोना के संक्रमण काल में जब लाकडाउन बढ़ा तो यह समाचार टीवी और अखबारों के माध्यम से सुनने को मिला था कि मजदूरों को घर जाने के लिए भाड़ा नहीं देना पड़ेगा और वह निशुल्क में यात्रा कर सकेंगे उनके यात्रा पर आने वाला खर्च 15% राज्य सरकार देगी और 50% केंद्र सरकार देगी लेकिन बाद में यह सरकारी दावे एकदम खोखले निकले और मजदूरों को 50 दिन भूखों मरने के बाद भी अब उन्हें पैसा खर्च करके वापस अपने घर आना पड़ रहा है
पाई पाई को मोहताज मजदूरों के सामने रोटी रोजी के साथ-साथ टिकट जुटाने का इंतजाम करना बेहद कष्टकारी साबित हो रहा है मुफ्त जाने की सूचना पाकर मजदूर के पास जो भी पैसा था वो भी पैसा उसने अपने खाने-पीने में खर्च कर दिया अब मजदूर खाली हाथ हैं और उनके पास पैसा नहीं बचा है जब मजदूर स्टेशन पर जा रहे हैं तो उन्हें अब बताया जा रहा है कि सरकार ने यह कहा था कि " टिकट मे 85% सबसिडी केंद्र की और बाकी 15% राज्य सरकार देगी इसका मतलब क्या है?मान लीजिये मुंबई से दिल्ली जाना है और उसका टिकट 600 रु है इसका मतलब यह नहीं है कि अब इसमें से 85% अर्थात 510 रु केंद्र और 15% अर्थात 90 रु राज्य सरकार देगी सरकार कह रही है कि टिकट का दाम चाहे 600 रु है पर उसकी फाइल में वो 4000 रु है और उसने पहले ही 85% सबसिडी देकर टिकट 600 रु रखा हुआ है इसलिए टिकट का 15% दाम अर्थात 600 रु और अब इसमें जोड़ा गया 50 रु सारा मजदूर या राज्य को ही देना है मतलब सरकार कुछ नहीं दे रही थी तब भी 650 में ही टिकट खरीदना था और सरकार अब 85% दे रही है  तब भी मजदूरों को टिकट 650 रु में ही खरीदना है वाह क्या गणित लगाते हैं सरकार में बैठे लोग?
अब श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आ रहे यात्रियों ने मुफ्त यात्रा के दावों की लगातार पोल खुल रही है। टिकट पर छपे किराए से ज्यादा की वसूली की जा रही है शुक्रवार को 1257 यात्रियों को लेकर बड़ोदरा से जौनपुर आई स्पेशल ट्रेन में सवार यात्रियों से टिकट के 640 रुपये लिए गए थे जबकि टिकट मूल्य 605 रुपये ही था अतिरिक्त रुपये देने के बाद यात्री 20 घंटे के सफर में वह भोजन-पानी के लिए तड़पते रहे।  ट्रेन में सबसे ज्यादा 729 यात्री जौनपुर के थे इसके अलावा प्रयागराज के 266, आजमगढ़ के 48, अमेठी के 34, रायबरेली के 26, जालौन के 13, अयोध्या के 12 यात्री थे पांच यात्री राजस्थान और एक मध्य प्रदेश के मंडला का रहने वाला था जांच के बाद स्टेशन के बाहर लगी रोडवेज की बसों में सवार कर उन्हें गंतव्य को रवाना किया गया
सरकार को सँकट की इस घड़ी में मजदूरों के साथ इस तरह का खेल नहीं करना चाहिए क्योंकि मजदूर भी आजाद भारत के नागरिक हैं और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही है और आगे भी रहेगी

मुख्य संवाददाता
राहुल त्यागी की रिपोर्ट 

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