Saturday, June 13, 2020

स्वास्थ्य सेवाओं का सच- 24 घँटे बीतने के बाद भी कोरोना पॉजिटिव को नहीं लेने पहुँची मेडिकल टीम

कानपुर-अनलॉक वन की छूट के साथ इस माह शहर में कोरोना के बढ़ते मामलों की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार को रिकार्ड 53 नए मामले सामने आए हैं। उधर, कोरोना से पीडि़त शहर की एक महिला ने लखनऊ के एसजीपीआइ में दम तोड़ दिया। फिर भी स्वास्थ महकमें की सुस्ती कम होने का नाम नही ले रही है शुक्रवार 53 पाज़िटिव रिपोर्ट में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के कंप्यूटर विभाग में कार्यरत युवक जोकि यशोदा नगर निवासी है इनकी कोविड-19 की जांच रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी।जिसके बाद से संक्रमित का परिवार लगातार प्रयास में लगा की मरीज को घर से ले जाने के लिए मेडिकल टीम आ जाए या कम से कम एंबुलेंस भेजी जाए ऐसा तो कुछ हुआ नहीं उल्टे नौबस्ता थाने के दो सिपाही उनके घर पर आकर बैठ जाते हैं और संक्रमित सहित घर के प्रत्येक सदस्य का घर से बाहर निकलना रोक देते हैं यानी अगर अब परिवार वाले प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराना चाहें तो उनके लिए मुमकिन नहीं है पुलिस ने उस पर भी रोक लगा दी और शनिवार की दोपहर 12:00 बजे तक 24 घंटे मरीज का परिवार स्वास्थ्य विभाग से हर आधे घंटे में गुहार लगाता रहा कि संक्रमित को ले जाने के लिए एंबुलेंस भेज दी जाए मेडिकल टीम भेज दी जाए कोई नहीं आया।इसके बाद भाजपा की दक्षिण जिला अध्यक्ष से गुहार लगाई गई उनको सीएमओ ने बजाए अपनी गलती मानने के गलत जानकारी देने की कोशिश की बजाय एंबुलेंस भेजने के अपनी सफाई पेश करने की कोशिश कर रहे है और मरीज और उनका परिवार इलाज कराने के लिए लोगों से गुहार लगा रहा है ये है स्वस्थ महकमे के कड़वा सच जहाँ महापौर के अधिवक्ता पुत्र और उसके अधिवक्ता साथी जो कि कानपुर बार और लायर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी है उनके इलाज की व्यवस्था शुक्रवार को ही कर दी गयी थी क्योंकि मामला हाई प्रोफाइल था वही एक संक्रमित 24 घण्टे से एम्बुलेंस की आस में अपने परिवार के साथ घर मे कैद है।ये बात कहने की नहीं महसूस करने की है की हाई प्रोफइल लोगो के लिए एम्बुलेंस और अजंता के लिए नगर बस सेवा। 

अब टी सरकारी बसों में भी बैठने में दर लगता है की कही इसे संक्रमित को लेन के लिए तो इस्तेमाल तो नहीं किया गया है  

कानपूर संवाददाता 
असरफ जमाल की रिपोर्ट 

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