Saturday, June 13, 2020

कोरोना मरीजों के इलाज का सलीका दिल दहलाने वाला

शवों का रखरखाव भी ठीक तरीके से नहीं

सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकारों से जवाब तलब

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने कोरोना मरीजों के इलाज के सलीके को दिल दहलाने वाला बताया है। यह भी कहा गया है कि अस्पतालों में शवों को भी ठीक से नहीं रखा जा रहा। इस बावत स्वत: संज्ञान लेते हुए विद्वान न्यायाधीशों की पीठ ने केंद्र और विभिन्न राज्यों की सरकारों से भी जवाब तलब किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज और उनके साथ ही शवों को रखे जाने को दिल दहलाने वाला वातावरण बताया। इस बावत अदालत ने केन्द्र और विभिन्न राज्य सरकारों से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि अस्पताल न तो शवों को ठीक से रखने की ओर ध्यान दे रहे हैं और न ही मृतकों के बारे में उनके परिवार को ही सूचित कर रहे हैं। नतीजा यह हो रहा है कि मृतिकों के परिजन अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान केन्द्र के साथ ही महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु को नोटिस जारी किये। पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि दिल्ली की स्थिति तो बहुत ही भयावह और दयनीय है। न्यायालय ने कहा कि केन्द्र सरकार के दिशा निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है।
न्यायालय ने राज्यों के मुख्य सचिवों को मरीजों के प्रबंधन की व्यवस्था का जायजा लेकर अस्पताल के स्टाफ और मरीजों की देखभाल के बारे में स्थिति की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने पिछले गुरुवार को देश के विभिन्न राज्यों में कोविड-19 के मरीजों की ठीक से देखभाल नहीं होने और पीडि़तों के शवों का मर्यादित तरीके से निस्तारण नहीं किये जाने की खबरों का स्वत: ही संज्ञान लिया था।
प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे ने इस स्थिति का संज्ञान लेने के बाद यह मामला न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ को सौंप दिया था। अदालत के इस रुख को देखकर अब उम्मीद बंधी है कि कोरोना मरीजों का इलाज काफी हद तक दर्द और अमानवीयता से रहित हो जाएगा।

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