कानपुर से लेकर लखनऊ हाईवे में जाजमऊ से भौती तक सबसे लंबा पल बना हुआ है।
कानपुर लखनऊ हाइवे में जाजमऊ से लेकर भौंती तक दुनियाँ का सबसे लंबा पुल बना हुआ है।इसके बीच मे रामादेवी, नौबस्ता, बर्रा जैसे बड़े चौराहे पड़ते है जिन्हें ये ये पुल ऊपर ही ऊपर क्रॉस कर जाता है। फोर लेन का ये हाइवे अटल सरकार आने से पहले तक संकरी सी सिंगल सड़क हुआ करती थी। रोज इस संकरी सड़क से हज़ारों ट्रक गुजरते थे। रोड इतना संकरा था कि ट्रक के ओवरटेक करते वक्त साइकिल या स्कूटर से चलने वाले उतर कर नीचे खड़े हो जाते थे। सड़क के दोनो तरफ बबूल के घने पेड़ो की एक चौड़ी पट्टी थी। रामादेवी से भौंती की ओर बढ़ते ही बाएं हाथ पर एक गांव पड़ता है दहेली।
वहां एक बदमाश हुआ करता था, चन्दन। वन मैंन आर्मी। बेहद शातिर और चालाक। सैकड़ों हत्याएं कर चुका था। लोगों को मार के गांव के पीछे ही जमीन में दफना दिया करता था। एनकाउंटर का आदेश था। जिलाबदर अपराधी था मगर शान से गांव में रहता था। जब कभी पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए जाती तो उसकी पत्नी और साली मकान की छत पर खड़े होकर पुलिस पर गोलियां चलाती थी। जमीनों पर वैध कब्जे करता था। मतलब दस हज़ार की जमीन पाँच सौ में खरीद लेता था। जिसने इनकार किया उसकी लाश भी कभी नहीं मिली। उसके साथ जमीनों में पंजे वाले एक सांसद और पूर्व मंत्री, साइकिल वाले चाचा जी पार्टनर थे। रामादेवी टेम्पो स्टैंड पर कब्जा था। पैसे की कोई कमी नहीं थी, राजनीतिक और प्रशासनिक पकड़ ज़बरदस्त।
एक विवाह समारोह में वहां के किसी बदमाश से पंगा हो गया। उस बदमाश ने चन्दन पर दुनाली बंदूक से फायर कर दिया। निशाना मिस हो गया और पूरी बारात के सामने चन्दनलाल नें उसकी गर्दन में दांत गड़ा के मार डाला। उस केस का मुकदमा तो दर्ज हुआ मगर चन्दनलाल कभी गिरफ्तार नहीं हुआ। किसी मे हिम्मत ही नही थी उसके खिलाफ गवाही देने की। चंदन बजरंगबली का भक्त था तो मंगलवार को किसी तरह हथियार नहीं रखता था अपने पास। ये बात उसके दो ड्राइवरों को पता थी जो सगे भाई थे। एक मंगलवार कोर्ट से लौटते वक्त दोनों ड्राइवरों ने उसे और उसकी पत्नी को घर के सामने ही चापड़ के काट डाला। साली भी साथ मे थी जो चापड़ के हमले में बुरी तरह घायल तो हुई मगर जिंदा बच गई।
दोनों भाई जेल से लौटे और चन्दनलाल की जमीनों, मार्केट और टेम्पो स्टैंड पर कब्जा कर लिया। चन्दनलाल का बेटा उस वक्त बहुत छोटा था। जब थोड़ा बड़ा हुआ तो उसने पैरवी कर के हाईकोर्ट से दोनों की जमानत रद्द करवा दी। दोनों भाई फिर से जेल चले गए। उनके पास बोरों में भर भर के नोट रखे हुए थे जो नोटबन्दी में घर पर ही सड़ गए। चंदन का बेटा अब 26-27 साल का है। सारी जमीनें उसने वापस ले ली है। रामादेवी टेम्पो स्टैण्ड पर फिर से उसका कब्जा है। बड़े बड़े नेता उसके साथ जमीनों में हिस्सेदार हैं। वो खुद भी सपा का नेता है। उसने खुद तो एक भी हत्या नहीं की मगर उसके चचेरे और फुफेरे भाइयों ने कानपुर की कुछ बड़ी ही कुख्यात हत्याएं की हैं और सब सेशन कोर्ट से बाइज़्ज़त बरी हो चुके हैं। टोंटी भैया के साथ उसकी और उसके भाइयों की दर्जनों फोटो उसके ऑफिस में लगी हैं। योगी जी के आने के बाद इन लड़कों ने चींटी भी नही मारी है।
कल को यही लड़का कोई बड़ा कांड कर दें तो टोंटी भैया चूड़ी तोड़ के विधेवा विलाप करेंगे कि योगी सरकार में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
सह संपादक
प्रशांत तिवारी की रिपोर्ट

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