प्रमुख बिंदु विज्ञप्ति शिक्षा नीति - 2020 व विद्या भारती बज्र प्रदेश द्वारा ऑनलाइन शिक्षण आदि बिन्दुओ पर सर्वेक्षण
प्रमुख बिंदु विज्ञप्ति शिक्षा नीति -2020 व विद्या भारती ब्रज प्रदेश द्वारा ऑनलाइन शिक्षण आदि बिन्दुओं पर सर्वेक्षण के आधार पर अभिभावकों का अभिमत विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा गैर - सरकारी संगठन है जिसके मार्गदर्शन में सम्पूर्ण भारतवर्ष में लगभग 20000 विद्यालय संचालित हैं । कोदिड -19 की वैश्विक महामारी से जहाँ सम्पूर्ण सामाजिक जीवन प्रभावित हुआ , वहीं शिक्षा व्यवस्था भी बुरी तरह चरमरा गयी । विद्या भारती ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए ऑनलाइन शिक्षण को कुशलतापूर्वक संचालित किया । समाज में इसकी सर्वत्र स्वीकार्यता बढ़ी । कुछ नकारात्मक पहलू भी सामने आए । विद्या भारती ब्रज प्रदेश ने छात्र छात्राओं के हित को ध्यान में रखकर 88341 अभिभावकों से ऑनलाइन शिक्षण व कुछ अन्य बिन्दुओं पर अगस्त माह के प्रथम पक्ष में एक व्यापक सर्वे द्वारा सुझाव मांगे , जिनका अत्यन्त उत्साहवर्दधक परिणाम आया । 52 % अभिभावक ऑनलाइन टीचिंग से संतुष्ट थे वहीं 42 % ने सुधार की अपेक्षा की । सभी अभिभावक छात्र - छात्राओं के कक्ष - शिक्षण लिए चिन्तित दिखाई दिए । 45 % अभिभावकों ने 01 सितम्बर से , 18 % ने 15 सितम्बर से और 25 % ने 01 अक्टूबर से विद्यालय खोलने का सुझाव दिया । 14 % अभिभावकों का मत कोविड -19 को ध्यान रखकर और आगे का था । सभी अभिभावकों का मत था कि विद्यालय खोलने में विश्व स्वास्थ्य संगठन और शिक्षा मंत्रालय द्वारा निर्देशित मानकों का पूर्णतः पालन किया जाए । विद्यालय कक्ष नित्य सैनीटाइज किए जाए व सम - विषम , दो पालियों में संचालित किए जा सकते हैं विद्या भारती ब्रज प्रदेश , अभिभावकों के सुझाव से पूर्णतः सहमत है कि विद्यालय प्रशासनिक आदेशानुसार ही संचालित हों । सर्वे के आंकड़ों के सभी अभिलेख प्रान्तीय प्रचार विभाग में सुरक्षित हैं । सम्पूर्ण विद्या भारती परिवार इस संक्रमण से मुक्त स्वाभाविक जीवन जीने के लिए प्रभु से प्रार्थना करता है । नई शिक्षा नीति -2020 जिस तरह से एक जगह रुका हुआ पानी बदबू मारने लगता है उसी तरह एक पुरानी पद्धति से पढ़ाई करने पर बच्चों को शिक्षा से लाभ मिलना बंद हो जाता है . यही कारण है कि भारत में समय समय पर शिक्षा नीति को बदला जाता रहा है.भारत में सबसे पहली शिक्षा नीति 1968 में आई थी . 1986 में दूसरी शिक्षा नीति बनी जिसमें 1992 में कुछ बदलाव किये गये . इस प्रकार 34 साल पुरानी शिक्षा नीति चल रही थी जो कि बदलते परिद्रश्य के साथ प्रभावहीन हो रही थी . वर्ष 2019 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय नयी शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार कर जनता से सलाह मागी थी . नयी शिक्षा नीति 2020 को कैबिनेट ने 29 जुलाई को मंजूरी दी . इस नयी शिक्षा नीति का मसौदा पूर्व इसरो प्रमुख के . कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक समिति ने तैयार किया है . नई शिक्षा नीति सकल घरेलू उत्पाद ( GDP ) का 6 % खर्च शिक्षा पर किया जायेगा जो अभी 4.43 % है . 2. अब पांचवी कक्षा तक की शिक्षा मातृ भाषा में होगी . 3. मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय 4. साल 2030 तक हर बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित 5. वर्ष 2030 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात ( Gross Enrolment Ratio GER ) जो वर्ष 2018 में 26.3 % को का लक्ष्य 6 . स्कूली शिक्षा में 10 + 2 खत्म , 5 + 3 + 3 + की नई व्यवस्थाः फाउंडेशन स्टेज पहले 5 साल : प्री - प्राइमरी स्कूल ( 3-6 साल के बच्चों के लिए ) 3 साल कक्षा 1 - कक्षा 2 , अगले 3 साल : कक्षा 3-5 , अगले 3 साल मध्य चरण ( कक्षा 6 से 8 ) माध्यमिक के 4 वर्ष ( कक्षा 9-12 ) स्कूलों में छात्र अब जो भी पाठ्यक्रम चाहें , वो ले सकते हैं कला , वाणिज्य , विज्ञान स्ट्रीम का कोई कठोर पालन नहीं 7. सातक की डिग्री 3-4 साल की छात्रों के परफॉर्मेस का डिजिटल रिकॉर्ड इकट्ठा किया जाएगा . 8.छठी क्लास से वोकेशनल कोर्स शुरू 6 वीं कक्षा के बाद से ही इंटर्नशिप . 9. 2050 तक स्कूल व उच्च शिक्षा के माध्यम से कम से कम 50 % शिक्षार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा में शामिल होना होगा . 10 . एटी और एग्जिट सिस्टम . अभी यदि कोई छात्र तीन साल इंजीनियरिंग पढ़ने या छह सेमेस्टर पढ़ने के बाद किसी कारण से आगे की पढाई नहीं कर पाता तो उसको कुछ भी हासिल नहीं होता . लेकिन अब मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम में । साल के बाद पढ़ाई छोड़ने पर सर्टिफिकेट 2 साल के बाद डिप्लोमा और 3-4 साल के बाद डिग्री मिल जाएगी . इससे देश में ड्राप आउट रेश्यो कम होगा . 11. Temporary Dropping : 3172 छात्र किसी बीच में छोड़कर दूसरे कोर्स में एडमिशन लेना चाहें तो वो पहले कोर्स से एक खास निश्चित समय तक ब्रेक ले सकता है और दूसरा कोर्स ज्वाइन कर सकता है और इसे पूरा करने के बाद फिर से पहले वाले कोर्स को जारी रख सकता है . 12 NTA द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में एडमिशन के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जाम ( सभी लागू नहीं ) 13. सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज , डीम्ड यूनविर्सिटी , और स्टैंडअलोन इंस्टिट्यूशंस के लिए समान नियम होंगे 14. लॉ और मेडिकल एजुकेशन छोड़कर समस्त उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल रेगुलेटर भारत उच्च शिक्षा आयोग ( HECI ) का गठन किया जाएगा . उच्च शिक्षा में 3.5 करोड़ नई सीटें जोड़ी जाएंगी . 15. शोध व अनुसन्धान की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन ( NRF ) की स्थापना . 16. ई - पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फोरम ( NETE ) with वर्चुअल लैब की स्थापना . 17. संगीत , दर्शन , कला , नृत्य , रंगमंच , उच्च संस्थानों की शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल होंगे भारतीय शिक्षा समिति ब्रज प्रदेश यूपी बोर्ड एवं सीबीएसई बोर्ड , विद्या भारती के सहमंत्री डा ० अनिल गर्ग व राम किशोर श्री वास्तव जी के अनुसार नई शिक्षा नीति बदलती हुई जरूरतों के मद्दे नजर एक कान्तिकारी कदम है जो भारत को विश्वगुरु बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी । प्रगतिशील और सुस्पष्ट शिक्षा नीति लाने के लिये पीएम मोदी व शिक्षा मंत्री को हार्दिक बधाई व आभार व्यक्त किया गया । कार्यक्रम संचालन श्री सुनील कुमार सिंह संकुल प्रमुख बरेली द्वारा किया गया । हस्ताक्षर उपस्थित अधिकारी- ( 1 ) ( 3 ) 50 % पहुँचाने काल मल्टीपल श्री सुनील कुमार सिंह प्रधानाचार्य 9568298699
खबर सूत्रों के हवाले से

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