आरोग्य सेतु के बारे में गलत फहमी दूर हो गयी आप भी पूरा पढ़े।
आरोग्य सेतु के बारे में गलत फहमी दूर हो गयी आप भी पूरा पढ़े।
कैसे काम करता है आरोग्य सेतु
आज समझ आया कि आरोग्य सेतू कैसे कार्य करता है।
आज शाम बहुत पुराने या यू कहिये हाफ पैंट जमाने के मित्र का फोन आ गया।
बन्दा बीटेक करके "भारतीय इंजीनियरिंग सेवा" मे चला गया था।
कभी कभार जब वह कानपुर आता तो मुलाकात हो जाती है।
पिछ्ली बार लगभग 7 साल पहले हम लोगो की मुलाकात हुई थी।
उस वक्त मेरा मोबाईल नम्बर ले गया था।
काल आया तो पहले हाल चाल हुआ।
बातो का सिलसिला चला तो मालूम हुआ आजकल स्वास्थ्य मंत्रालय के अन्तर्गत पोस्टिंग है।
यह जानकर मैने पूछ ही लिया भाई !
यह आरोग्य सेतू क्या बला है?
अब तक जो भी सुना पढ़ा है उससे यह तो समझ आ गया कि यह कोई वायरस ट्रैकर तो है नही जो शरीर मे कोरोना वायरस आने की जानकारी दे दे फ़िर कोई क्यो आरोग्य सेतू डाउनलोड करे।
उसने बताया
यह सत्य है कि आरोग्य सेतू कोई कोरोना ट्रैकर एप्पस नही है।
"वायरस" बायोटेक्नोलॉजी का विषय है और आप जानते हो कि हम बीटेक करने वाले बायलोजी को कक्षा 10 के बाद ही बाय-बाय बोल देते है।
मगर मेरे पास जो जानकारी है उसके अनुसार अभी कोरोना संक्रमित व्यक्ति की पुष्टि लैब मे परीक्षण के बाद ही होती है।
एक ही सैम्पल का 3 बार टेस्ट करने के बाद ही पक्का होता है कि अमुक व्यक्ति कोरोना संक्रमित है।
अब समझो कि आरोग्य सेतू कैसे काम करता है?
मान लो आपके व हमारे मोबाइल मे आरोग्य सेतू है।
आप और हम जब कोई भी एप्पस डाउनलोड करते है तो एप्पस के कंट्रोलीग सिस्टम मे एक कोड जनरेट होता होता है और आपके लागिन करने से कोड के उपयोगकर्ता के रुप मे आपका नाम, मोबाइल नम्बर या ईमेल आइडी दर्ज हो जाता है।
अब मान लीजिये हम दोनो ने आरोग्य सेतू एप्पस डाउनलोड किया हूआ है।
हम दोनो के बीच कोई जान पहिचान नही है।
आप और हम एक ही समय पर चौक बाजार गये। इत्तिफाक से आपकी और हमारी दूरी 9 फीट से कम होती है और हम दोनो के मोबाइल का Blue tooth आन है तो आपके व हमारे मोबाइल का आरोग्य सेतू एक दुशरे का सिग्नल कलेक्ट कर लेगा।
मतलब आपके आरोग्य सेतू यह नोट कर लेगा कि अमुक कोड वाला व्यक्ति अमुक कोड वाले व्यक्ति के सम्पर्क मे इस समय इस स्थान पर आया।
अब मान लीजिये मै किसी भी तरह से कोरोना संक्रमित हो गया।
मेरा स्वाब टेस्ट के लिये लैब मे जायेगा।
कलेक्ट किया गया सैम्पल जैसे ही लैब मे पहुचेगा लैब मे सैम्पल लिये जाने वाले व्यक्ति का डिटेल अपने कम्पयूटर मे भरा जायेगा।
जैसे ही वह कम्प्यूटर मे मेरा नाम पता फोन नम्बर वगैरह डालेगा दिल्ली के कंट्रोल रूम के पास जानकारी हो जायेगी कि इस व्यक्ति की जांच के सैम्पल इस लैब मे आया है।
कम्प्यूटर मे आपके डिटेल डालने के बाद सैम्पल की जांच प्रक्रिया आगे बढेगी।
जांच के उपरांत जब यह तय हो जायेगा कि मै पाजिटिव हुँ या निगेटिव तब मेरे डिटेल ले आगे ही लिखा जायेगा कि मै निगेटिव हुँ या पाजिटीव।
अब अगर मै पाजिटिव हूआ तो मेरे मोबाइल नम्बर से जुडा आरोग्य सेतू एक्टिव हो जायेगा और 21 दिन के भीतर जितने "आरोग्य सेतू" मेरे सम्पर्क मे आये है सबको नोटिफिकेशन भेज कर उनके एप्पस को आरेन्ज कर देगा।
इसका सामान्य मतलब यह समझिये कि रिपोर्ट प्रिंट होने से भी पहले आपके पास सूचना आ जायेगी कि आप अमुक तारिख को अमुक समय पर अमुक स्थान पर किसी व्यक्ति के सुरक्षा दायरे के अंदर आये थे और वह व्यक्ति आज कोरोना पाजिटिव पाया गया है।
इसके साथ ही कुछ निर्देश भी आपके लिये होँगे।
मित्र ने बताया कि एक पढे लिखे समझदार नागरिक से अपेक्षा की जाती है कि जैसे ही उसको नोटिफिकेशन मिले वह खुद अस्पताल जाकर आरोग्य सेतू पर आयी जानकारी दिखा कर डाक्टर से सलाह ले।
आगे की कार्यवाही डाक्टर को करनी है आपको केवल उनके निर्देश मानने है।
मैने पुछा अगर मै ना जाऊ तो ??
उसने कहा नही जाओगे तो टीम आयेगी। मोहल्ले के लोग खिडकी से झांक कर ऐसे देख रहे होँगे जैसे चोरी मे पकडे गये हो।
बेइज्जती होगी मगर जाना तो पडेगा ही।
बस फर्क इतना है कि खुद से सामने आने वालो को अस्पताल के डाक्टर व अन्य स्टाफ भी इज्जत देते है।
"आरोग्य सेतू" पर अब मुझे कोई शक नही है।
मेरा मानना है कि घर से निकलने से पहले अनिवार्य रुप से चेक कर लिया जाये कि मोबाइल का ब्लू टूथ व लोकेशन आन है या नही इसके बाद ही कदम बाहर रखा जाय
खबर सूत्रों से
Labels: National News

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