अस्पताल कि उपेक्षा और भूख और दर्द से तड़फती होनहार छात्रा, सातवीं मंजिल से कूदकर की ख़ुदकुशी
नोएडा सेक्टर 24 स्थित “मॉडल ईएसआई” हॉस्पिटल इन दिनों लगातार सुर्खियों में बना हुआ है, पहले गर्भवती महिला की मौत के बाद यहां के निदेशक को बदला गया था, अब एक 22 वर्षीय युवती के सातवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर लेने पर एक बार फिर ईएसआई हॉस्पिटल पर दाग लगा है। लड़की के परिजनों ने अस्पताल पर अनदेखी करने के आरोप के साथ-साथ, उसकी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। वही ईएसआई हॉस्पिटल के निदेशक की तरफ से सफाई आई है कि शायद युवती को ही कोई व्यक्तिगत परेशानी थी, जिसके कारण उसने ये कदम उठाया, उनके स्टाफ की तरफ से कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। वही पुलिस गुपचुप तरीके से शव का पंचनामा भरकर आवश्यक कार्रवाई करने के बाद विधिक कार्रवाही करने की बात कह रही है।
एक होनहार बीकॉम कि छात्रा कंचन कि ये तस्वीर अब परिवार को उसकी याद दिलाती रहेगी, दर्द से तड़फती हुई 22 वर्षीय कंचन के ईएसआईसी अस्पताल के सातवीं मंजिल से कूद कर आत्महत्या कर ली। नोएडा के सेक्टर 45 के खजूरी कॉलोनी में रहने वाले पूजा राम की बेटी कंचन को रविवार की सुबह 10:00 बजे ईएसआई हॉस्पिटल में इलाज के लिए लेकर आए थे। भाई अनिल कुमार ने बताया कि भर्ती करने के नाम पर उन्हें सुबह से लेकर शाम तक दौड़ाया गया आखिरकार शाम को 7:00 बजे सातवें फ्लोर पर स्थित आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर लिया गया। अनिल ने बताया कि उसे टीवी रोग था उसे कोरोना नहीं था उसकी बहन दर्द से तड़प रही थी और इलाज न किए जाने पर काफी परेशान थी वह बार-बार अस्पताल के कर्मचारियों से कह देती है सर मेरा इलाज कर दीजिए मेरा इलाज कब करोगे जब मैं मर जाऊंगी।
एक होनहार बीकॉम कि छात्रा कंचन कि ये तस्वीर अब परिवार को उसकी याद दिलाती रहेगी, दर्द से तड़फती हुई 22 वर्षीय कंचन के ईएसआईसी अस्पताल के सातवीं मंजिल से कूद कर आत्महत्या कर ली। नोएडा के सेक्टर 45 के खजूरी कॉलोनी में रहने वाले पूजा राम की बेटी कंचन को रविवार की सुबह 10:00 बजे ईएसआई हॉस्पिटल में इलाज के लिए लेकर आए थे। भाई अनिल कुमार ने बताया कि भर्ती करने के नाम पर उन्हें सुबह से लेकर शाम तक दौड़ाया गया आखिरकार शाम को 7:00 बजे सातवें फ्लोर पर स्थित आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर लिया गया। अनिल ने बताया कि उसे टीवी रोग था उसे कोरोना नहीं था उसकी बहन दर्द से तड़प रही थी और इलाज न किए जाने पर काफी परेशान थी वह बार-बार अस्पताल के कर्मचारियों से कह देती है सर मेरा इलाज कर दीजिए मेरा इलाज कब करोगे जब मैं मर जाऊंगी।
भाई अनिल का कहना है कि पहले अस्पताल के स्टाफ उसको भर्ती करने को तैयार नहीं थे फिर किसी तरह से भर्ती किया तो रात भर उसको भूखा रखा गया । स्टाफ का एक आदमी खाने की थाली लेकर आया था लेकिन बाद में वह खाली उसके सामने से खींच कर ले गया कहा यह दूसरे मरीज की है तुम्हें खाना कल मिलेगा। दर्द और भूख से तड़फती कंचन ने अपने पिता पूजाराम से पीने के लिए जूस मांगा था पूजा राम नीचे जूस लेने आए उसी दौरान कंचन ने खिड़की से कूदकर आत्महत्या कर ली।
कंचन के परिजनों का आरोप है कि कोई अस्पताल कि सातवीं मंजिल से कूद जाता है और अस्पताल के कर्मचारियों को भनक तक नहीं लगती है परिजनों ने अस्पताल पर अनदेखी करने के साथ-साथ, उसकी मौत का जिम्मेदार भी ठहराया है। ऐसा कैसे हो सकता है जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वही ईएसआई हॉस्पिटल के निदेशक की तरफ से सफाई आई है कि शायद युवती को ही कोई व्यक्तिगत परेशानी थी, जिसके कारण उसने ये कदम उठाया। पुलिस शव का पंचनामा भरकर आवश्यक कार्रवाई करने के बाद विधिक कार्रवाही करने कि बात कह रही है।
नोएडा संवाददाता की रिपोर्ट
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