रघुवंश प्रसाद सिंह का राजद उपाध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा क्यों?
रघुवंश प्रसाद सिंह का राजद उपाध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा क्यों?
बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीख़ें अभी तय नहीं है लेकिन यहां राजनीति अब करवटें लेने लगी हैं.
विधानसभा चुनाव का सेमीफ़ाइनल माने जा रहे विधान परिषद की नौ सीटों पर चुनाव से ठीक पहले विपक्षी पार्टी राजद में भूचाल आ गया है.
मंगलवार को बिहार विधान परिषद की तरफ़ से जारी एक अधिसूचना के मुताबिक़ राजद के आठ में दो तिहाई यानी पाँच विधान पार्षदों ने एक अलग समूह बनाकर पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया और सत्तारूढ़ दल जदयू में शामिल हो गए. कार्यकारी सभापति, विधान परिषद के आदेश से उनके विलय को स्वीकृति भी मिल चुकी है.
राजद छोड़कर जदयू में शामिल होने वाले पाँचों एमएलसी हैं, राधाचरण साह, रण विजय सिंह, दिलीप राय, कमरे आलम और संजय प्रसाद.
इसके अलावा राजद को एक झटका और लगा है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.
रघुवंश प्रसाद सिंह इस वक़्त कोरोना वायरस से संक्रमित हैं और पटना स्थित एम्स अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती हैं.
बीबीसी से रघुवंश प्रसाद के सहायक केदार यादव ने कहा, "रघुवंश बाबू इस समय कोरोना से लड़ रहे हैं, लेकिन साथ ही उनकी लड़ाई अपराध से भी है. उनकी आपत्ति के बावजूद भी रामा सिंह जैसे आपराधिक छवि वाले आदमी को पार्टी में शामिल कर लिया गया है. इसी का विरोध जताने के लिए रघुवंश बाबू ने अपने पद से इस्तीफ़ा दिया है लेकिन, उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है."
चुनाव कैंपेन पर असर पड़ेगा
रघुवंश प्रसाद सिंह ने पिछले महीने 28 मई को एक ट्वीट भी किया था जिसमें उन्होंने लिखा था, "बिहार में सत्ता के संरक्षण में अपराध का खेल चल रहा है. राज्य में अपराधी बेख़ौफ़ हो चुके हैं. गोपालगंज में जेडीयू के नेता पुलिस प्रसाशन को खुली चुनौती दे रहे हैं. बिहार में बढ़ते अपराध के ख़िलाफ़ बड़ा आंदोलन शुरू होगा और यह आंदोलन सरकार को हटाने तक चलेगा."
खबर सूत्रों के हवाले से
Labels: National News


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