Tuesday, June 23, 2020

सफ़ूरा ज़रगर को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली ज़मानत- आज की बड़ी ख़बरें

दिल्ली दंगों में साज़िश रचने के आरोप में गिरफ़्तार जामिया मिल्लिया इस्लामिया की छात्रा सफ़ूरा ज़रगर को दिल्ली हाईकोर्ट से ज़मानत मिल गई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मानवीय आधार पर ज़मानत का विरोध नहीं किया, जिसके कारण अदालत ने ज़मानत दे दी.
सफ़ूरा ज़रगर छह महीने की गर्भवती हैं.
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी ज़िले में फ़रवरी में दंगे हुए थे जिनमें सरकारी आंकड़ों के अनुसार कम से कम 53 लोग मारे गए थे. मरने वालों में ज़्यादातर मुसलमान थे.
उसके बाद दिल्ली पुलिस ने कई छात्र-छात्राओं को गिरफ़्तार किया था जिनमें ज़्यादातर मुसलमान थे और जो दिसंबर-जनवरी में दिल्ली में शुरू हुए नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय थे या उनमें शामिल थे.
दिल्ली पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने दिल्ली दंगों की साज़िश रची थी.
लेकिन सरकार पर आरोप है कि वो इस महामारी और लॉकडाउन का इस्तेमाल फ़्री स्पीच और सरकार विरोधी आवाज़ों को दबाने के लिए कर रही है.
सफ़ूरा ज़रगर भी जामिया में होने वाले विरोध प्रदर्शन के लिए बने संगठन जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी की सदस्य थीं. सफ़ूरा के अलावा जामिया के ही छात्र मीरान हैदर, जामिया के पूर्व छात्र शिफ़ा को भी पुलिस ने गिरफ़्तार किया है.
सफ़ूरा ज़रगर को दिल्ली पुलिस ने 10 अप्रैल को गिरफ़्तार किया था.

दिल्ली पुलिस सफ़ूरा को 10 अप्रैल, शुक्रवार को दोपहर तीन बजे उनके घर से पूछताछ के लिए लोधी कॉलोनी पुलिस स्टेशन लाई और देर रात उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया. अगले दो दिनों तक सप्ताहांत के कारण अदालती कार्रवाई बंद थी इसलिए उन्हें मैजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया जा सका.
सफ़ूरा की गिरफ़्तारी 24 फ़रवरी को जाफ़राबाद थाने में दर्ज एक एफ़आईआर के तहत हुई है जो दक्षिणी दिल्ली में स्थित जामिया के कैंपस से लगभग 20 किलोमीटर दूर है.
इस केस में 13 अप्रैल को मजिस्ट्रेट ने उन्हें ज़मानत दे दी थी लेकिन इसके ठीक बाद रिहा करने के बजाय सफ़ूरा को 6 मार्च को एक दूसरी एफ़आईआर के तहत गिरफ़्तार कर लिया गया. और उन पर यूएपीए लगा दिया गया था.
इस मामले में 21 अप्रैल को सफ़ूरा की ज़मानत की अर्ज़ी मेट्रोप़ॉलिटन मजिस्ट्रेट ने ख़ारिज कर दी. उसके बाद भी उनकी ज़मानत ख़ारिज कर दी गई थी.
उनकी गिरफ़्तारी पर मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने एक बयान जारी कर कहा था, ''भारत सरकार फ़्री स्पीच और विरोध के स्वर को ज़रा भी बर्दाश्त नहीं करना चाहती है लेकिन सफ़ूरा ज़रगर को गिरफ़्तार करना जो कि तीन-चार महीने की गर्भवती हैं और उन्हें इस महामारी के दौरान भीड़ वाली जेल में भेजना दर्शाता है कि देश में इस समय कितनी निर्ममता से लोगों को दबाया जा रहा है.''
ज़रगर ने गर्भवती होने के आधार पर ज़मानत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अर्ज़ी दी थी. अदालत ने दिल्ली पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट दाख़िल करने के लिए कहा था. पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में सफ़ूरा ज़रगर की ज़मानत का विरोध किया था. पुलिस की दलील थी कि तिहाड़ जेल में रहते हुए इससे पहले कई क़ैदियों की डिलीवरी हुई है. इसलिए इस आधार पर सफ़ूरा को ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए.
लेकिन मंगलवार को केंद्र सरकार की तरफ़ से पेश हुए तुषार मेहता ने जब कोई आपत्ति नहीं जताई तो अदालत ने उन्हें सशर्त ज़मानत दे दी.
सफ़ूरा ज़रगर की तरफ़ से वरिष्ठ वकील नित्या रामाकृष्णन पेश हुईं थीं.
अदालत ने कहा है कि सफ़ूरा वो जाँच को किसी भी तरह से प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगी, न ही वो किसी भी तरह की गतिविधियों में शामिल होंगी और दिल्ली से बाहर जाने के लिए उन्हें पहले अदालत से इजाज़त लेनी होगी.

खबर सूत्रों के हवाले से 

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