कमाल है,राशन वितरण में नंबर 1 जिला घोषित,मगर लोगों के राशन कार्ड तक नहीं बन पा रहे हैं।
बाराबंकी –जाने कितने परिवारों के लोग राशन के दाने को पाने के लिए आपूर्ति कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं,कि उनका राशन कार्ड बन जाए और उन्हें इस कोरोना महामारी में खाने के लिए दाने पानी का इंतजाम हो जाए। मगर सूबे की राजधानी लखनऊ से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ तहसील पर गरीबों के हक का राशन हड़पने का खेल खेला जा रहा है। वहीं एसडीएम का कहना है राशन वितरण में हमारा जिला नंबर घोषित किया जा चुका है। और कुछ लोग तो लोग दाने-दाने को मोहताज हैं
सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना महामारी के समय में यह ऐलान किया था कि कोई भी व्यक्ति भूखा ना रहने पाए,मगर योगी आदित्यनाथ के ऐलान को पूरा कराने के लिए वही पुरानी सरकारी मशीनरी है जिसमें बरसों से जंग लगा हुआ है।अब इसे मशीनरी को कितना भी भी घिसने रगड़ने की कोशिश करो मगर यह जंग साफ होने का नाम ही नहीं लेती। इसे कहते हैं आलस की जंक इसे कहते हैं भ्रष्टाचार की जंक। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने अपने सूबे की जनता का ख्याल करते हुए यह ऐलान तो कर कोई भी भूखा ना रहे कोई भी राशन से वंचित ना हो मगर सोचने वाली बात यह है ये राशन लेने के लिए राशन कार्ड की जरूरत होती है, क्योंकि कोटेदार बगैर राशन कार्ड के राशन देने को तैयार नहीं होता।राशन कार्ड बन नहीं पाता और अगर किसी का बन भी जाए तो उसमें पात्रों के नाम तक कट जाते हैं,अब इन्हीं को देख लीजिए यह बरसों से राशन कार्ड बनवाने की कोशिश कर रहे हैं मगर इनका राशन कार्ड वनी नहीं पा रहा।
लोग राशन कार्ड बनवाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं और लगातार जिला आपूर्ति कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं मगर उनका राशन कार्ड नहीं बन पा रहा गौर करने की बात यह है कि आखिर राशन कार्ड में से पात्रों के नाम कैसे गायब हो जाते हैं यह खेल क्या है?इसमें भी किसी ना किसी तरीके से चली गई चालाकी की बू आप ही नजर आ रही है। एक- एक गांव के अंदर 50-50 लोगों के नाम राशन कार्ड में से काट दिए जाते हैं।आखिर ऐसा क्यों होता है? जब पूरी तरीके से यह सही लोग हैं यह पात्र है तो फिर राशन कार्ड से नाम कटने की वजह क्या है? यह बात अभी तक समझ से परे है?और उसके बाद उनका राशन नहीं मिल पाता अब यह लोग उन लोगों को जुड़वाने के लिए भी लगातार चक्कर काटते देखे जाते हैं और इन्हें यह नाम जुड़वाने के लिए पैसे भी खर्च करना पड़ते हैं।साथ ही धक्के खाने पड़ते हैं। फिलहाल ऐसे जाने कितने लोग हैं जिनके नाम उनके राशन कार्ड से काट दिए गए हैं।आखिर ऐसा क्यों होता है।यह खेल अभी तक समझ से परे।
सबसे ज्यादा कमाल के तो यह साहब है। एसडीएम साहब एसडीएम योगेंद्र कुमार साहब जब इनसे मीडिया कर्मियों ने बात की तो इन्होंने प्रतिबंधित गुटखा चबाते हुए,राशन के घपले बाजी की बात तो नहीं की।अपनी बड़ी बड़ी तारीफे अपने मुंह से ही कहने लगे।जनाब ने गुटखा चबाते हुए कहा हमारा जिला राशन वितरण में नंबर वन है।कमाल है लोग यहां पर पात्र होने पर भी उनके नाम काटे जा रहे हैं, उन्हें राशन का दाना नहीं मिल पा रहा है,और जिला नंबर वन हो गया है।
सरकारी अमला इस तरीके से नाकारा और निर्लज्ज हो गया है कि उसे गरीबों का दुख तक समझ में नहीं आ रहा।कोरोना महामारी के समय मैं लोगों को 2 जून की रोटी के लाले पड़े हुए हैं।सरकारी अमला अभी भी अपनी मनमानी तो उतरा हुआ है।कोई जिले को राशन वितरण में नंबर बंद बता रहा है कोई राशन कार्ड के बगैर राशन नहीं दे रहा है। फिलहाल जो भी हो इस समय लोगों को अपना पेट भरने के लिए दो जून की रोटी के लाले पड़े हुए हैं।
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